Sunday, January 29, 2023

घायल

 शरदऋतु की पंछीकी तरह,

प्रातःकाल की चाँदीकी तरह,

घायलीदिल की खामोषी है ये।


चुपतेकांटे के दामन है दिल,

पूछतेथके अनुत्तरित प्रश्न है कष्ट,

अप्रत्याशित जंगके मलवा है जीवन|

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